बुधवार, 14 सितंबर 2022

आवरण चित्र: मौली घर चली

 कई दिनों से यहाँ कुछ प्रकाशित नहीं कर रहा था लेकिन हाल ही में एक पुस्तक पढ़ी जिसका कवर मुझे बहुत पसंद आया और उसके विषय में लिखने से मैं खुद को रोक नहीं पाया। 

यह पुस्तक शिल्पा शर्मा की उपन्यासिका मौली घर चली है और इसका आवरण चित्र रश्मि श्रीवास्तव ने बना रखा है। मुझे तो यह बड़ा प्यारा और खुशनुमा लगा। आप भी देखिए। फिर कवर पर बातें करेंगे। 


शिल्पा शर्मा की यह पुस्तक एक अट्ठारह वर्षीय युवती की कहानी है। आवरण चित्र को देखें तो इसमें दो किरदार नजर आते हैं। यह किरदार एक युवती है और उसके पीछे एक युवक बैठा हुआ है। युवती और युवक के चेहरे पर मुस्कान दिख रही है। वहीं युवती आत्मविश्वासी भी नजर आती है। साथ-साथ आवरण चित्र में कलाकार रश्मि श्रीवास्तव ने रंग संयोजन ऐसा रखा है कि एक खुशनुमा सा एहसास आवरण चित्र को देख पर होता है। ऐसा लगता है कि जैसे इन दो किरदारों विशेषकर युवती (क्योंकि वो फोकस में है) के जीवन में खुशियाँ आ गई हैं। चूँकि मैं यह कहानी पढ़ चुका हूँ तो जानता हूँ कि यह सच भी है। 

आपका तो पता नहीं लेकिन मेरे चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान यह आवरण चित्र छोड़ जाता है। यह पुस्तक का आकर्षण कई गुना बढ़ा देता है।  रश्मि श्रीवास्तव इस कवर लिए वाकई बधाई की पात्र हैं और इस आवरण चित्र को मैं अपने पुस्तकालय में जरूर रखना चाहूँगा। वहीं मैं रश्मि जी से कवर के बनाने की प्रक्रिया को जरूर जानना चाहूँगा। 

वैसे तो अभी मौली घर चली केवल 53 पृष्ठों की उपन्यासिका ही है लेकिन उम्मीद करता हूँ लेखिका एक संग्रह निकालेंगी और इस आवरण चित्र को वहाँ पर स्थान देंगी। 

आपको यह आवरण चित्र कैसा लगा? मुझे बताना नहीं भूलिएगा। इस आवरण चित्र को देखकर आपके मन में क्या ख्याल आता है ये भी बताइएगा। 

पुस्तक लिंक: अमेज़न


बुधवार, 30 मार्च 2022

आवरण चित्र: आखिरी प्रेमगीत

रोचक आवरण चित्रों की बात आती है तो फ्लाइड्रीम्स प्रकाशन अपने द्वारा प्रकाशित उपन्यासों के आवरण चित्रों पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं।  उनके द्वारा प्रकाशित किताबों के आवरण चित्र मुझे आकर्षित करते रहे हैं। 

इसी शृंखला में अभिषेक जोशी का उपन्यास आखिरी आखिरी प्रेमगीत भी आता है। इस उपन्यास के आवरण चित्र पर मेरी नजर पड़ी तो बस टिकी ही रह गई थी। 

आवरण चित्र के विषय में बाद में बात करेंगे पहले आप आवरण चित्र को देखें:

 


आखिरी प्रेमगीत का कवर निशांत मौर्य ने बनाया है जो कि अपने द्वारा बनाए गए आवरण चित्रों के लिए जाने ही जाते हैं। अक्सर फोटो मैनीपुलेशन का इस्तेमाल कर सुंदर आवरण चित्र बनाने में उन्हें महारथ हासिल है। 

इस आवरण चित्र को आप देखते हैं तो आपकी नजर चित्र के तीन एलिमेंट्स पर पड़ती है। पहला चीज जो आपका ध्यान आकर्षित करती है वह नृत्यांगना है जो कि झूमते हुए नाचती दिख रही है। दूसरी चीज उसके पीछे मौजूद वीणा है जिससे अंदाज लगता है कि इसकी धुन पर वह नृत्य कर रही है। वहीं तीसरी चीज एक घेरा बना है हुआ जिसमें कोई डिजाइन बना हुआ है। 

इन तीनों को देखने पर आपके मन में सहसा ही ये प्रश्न उठने लगते हैं। 

यह कौन युवती है जो नृत्य कर रही है? 
यह वीणा कौन बजा रहा है? 
ये घेरा जो बना है क्या वह केवल आवरण को खूबसूरत बनाने के लिए बनाया गया है या फिर उसका कोई विशेष प्रयोजन है? 

इसके अलावा उपन्यास का शीर्षक 'आखिरी प्रेमगीत' (Aakhiri Premgeet) भी उत्सुकता जागृत करता है। 

यह आखिरी प्रेमगीत (Aakhiri Premgeet) किसका है? 
किसने इस प्रेमगीत को गाया है? 
यह प्रेमगीत क्यों गाया गया है?


चूँकि मैं उपन्यास पढ़ चुका हूँ तो इतना बता सकता हूँ कि उस डिजाइन का विशेष प्रयोजन है। अब प्रयोजन क्या है ये तो आपको उपन्यास पढ़कर ही पता चलेगा। वहीं  नृत्य कौन कर रहा है और वीणा कौन बजा रहा है यह भी आपको उपन्यास पढ़ने पर ही पता लगेगा। और शीर्षक उपन्यास के कथानक पर फिट बैठता है। उससे जुड़े प्रश्नों के उत्तर जानने के लिये आपको उपन्यास को ही पढ़ना पड़ेगा। 

अभी तो इतना ही कहूँगा कि आवरण चित्र पाठक के मन में उत्सुकता जगाने का कार्य बाखूबी कर रहा है। 

क्या आपके मन में इस आवरण को देखकर कुछ प्रश्न उठ रहे हैं?

अगर हाँ, तो कमेन्ट सेक्शन में मुझे बताना न भूलिएगा। 

अगर पुस्तक पर लिखी मेरी पाठकीय प्रतिक्रिया पढ़ना चाहें तो निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:

पुस्तक लिंक: अमेज़न 



मंगलवार, 13 जुलाई 2021

आवरण चित्र: सुन्दरता की ब्लैकमेलिंग

अगर बचपन में आपकी बाल उपन्यासों में रूचि रही हो तो ऐसा नहीं हो सकता है कि आपने कभी एस सी बेदी का नाम न सुना हो। 90 के दशक में उनके राजन-इकबाल श्रृंखला के उपन्यास काफी प्रसिद्ध हुए थे। 

यह चालीस पचास पृष्ठ के लघु-उपन्यास होते थे जिनकी कहानियाँ बहुत ही सरल होती थीं। बच्चों के बीच वह खासे प्रसिद्ध थे। इनके नायक राजन-इकबाल हुआ करते थे जो अपने प्रेमिकाओं शोभा और सलमा के साथ मिलकर देश के दुश्मनों से लोहा लिया करते थे।  चूँकि यह एक तरह से पल्प उपन्यास थे तो उनके आवरण चित्रों पर इसकी झलक मिलती थी और यह आवरण चित्र खासे आकर्षक होते थे। 

परन्तु यहाँ मैं ये बात साफ़ करना चाहूँगा कि अक्सर उनके आवरण चित्रों का कहानी से ज्यादा लेना देना नहीं होता था और यह मुझे उन आवरण चित्रों की कमी लगती थी। अब आज जो आवरण चित्र मैं प्रस्तुत करने जा रहा हूँ उसे ही देख लीजिये। 

आवरण चित्र: सुन्दरता की ब्लैकमेलिंग

तो देखा आपने आवरण चित्र। अब इस आवरण चित्र में गौर किया होगा कि यहाँ दो चरित्र दिखाई दे रहे हैं। एक तो यहाँ एक सूट बूट धारी मर्द है जिसके हाथ बंधे हुए हैं। वहीं दूसरा चरित्र एक सुन्दर युवती का है। युवती कपड़ों से शहरी नहीं बल्कि गाँव की लग रही है। वहीं उसने आदमी पर चाकू ताना हुआ है। आदमी के चेहरे पर निशान है जिससे खून रिस रहा है। निशान चाकू से लगा हुआ लगता है। 

आवरण चित्र देखते ही आपके दिमाग में कुछ प्रश्न उठने लगते हैं। यह व्यक्ति कौन है? यह युवती कौन है और उसने उस व्यक्ति को क्यों पकड़ कर रखा है? वह उसे पकड़ कर क्या हासिल करना चाहती है? क्या युवती अकेले काम कर रही है या फिर उसकी कोई गैंग भी है? 

चूँकि आवरण यह है तो आप यह सोचते हुए कहानी पढ़ने लगते हो कि कहानी में इसका जवाब मिलेगा लेकिन ऐसा होता नहीं है। इस आवरण का कहानी से दूर दूर तक लेना देना नहीं है। न ही कोई गाँव की गोरी यहाँ है और न ही वह किसी शहरी बाबू को कैद करके रखती है। 

ऐसा नहीं है कि उपन्यास रोचक नहीं है या उपन्यास की कहानी से मिलता जुलता आवरण चित्र प्रकाशक बना नहीं सकता था। परन्तु ऐसा न कर उसने ये चित्र क्यों दिया यह मुझे समझ नहीं आता है। कहानी के हिसाब से इससे कई गुना बेहतर कवर बन सकता था।

अभी तो मैं यही कहूँगा कि कवर आकर्षक जरूर है लेकिन उपन्यास के साथ चूँकि न्याय नहीं करता है मेरी नजर में एक अच्छा कवर नहीं है। कहते हैं न कि 'डोंट जज का बुक बाय इट्स कवर'। शायद इन उपन्यासों के लिए भी इसे कहा गया है। 

आपका क्या सोचना है? क्या आपको भी कभी ऐसे कहानी अलग और आवरण अलग देखने को मिला है? आप ऐसे आवरण चित्रों को किस तरह देखते हैं? मुझे बताइयेगा जरूर। 

गुरुवार, 3 जून 2021

आवरण चित्र: चालबाज़ बूढ़ा

सन 2009 के करीब हार्पर कॉलिंस हिन्दी ने लेखक इब्ने सफी के कई उपन्यासों को पुनः प्रकाशित किया था। अगर हिन्दी जासूसी उपन्यास पढ़ते आये हैं या आपने कभी उन्हें पढ़ा है तो आपने इब्ने सफी का नाम न सुना हो ये हो नहीं सकता। इब्ने सफी ने अपने जीवन में जासूसी दुनिया सीरीज और इमरान सीरीज के अंतर्गत सौ सौ उपन्यासों से ऊपर लिखे थे। जब हार्पर ने इन्हें पुनः प्रकाशित किया तो उन्होंने जासूसी दुनिया श्रृंखला के आठ उपन्यास और इमरान सीरीज के सात उपन्यासों को पुनः प्रकाशित किया। उपन्यासों का अनुवाद चौधरी ज़िया इमाम ने किया था।  ऐसा नहीं है कि इब्ने सफी के उपन्यास पहली बार हिन्दी में अनूदित होकर प्रकाशित हो रहे थे। यह उपन्यास पहले भी हिन्दी में अनूदित हुए हैं लेकिन उस वक्त जासूसी दुनिया के नायक फरीदी का नाम हिन्दी अनुवाद में विनोद रखा गया था। इस बार अच्छी बात यह हुई है कि मुख्य किरदारों के नामों में कोई तब्दीली न की गयी है। 

आज मैं आपके समक्ष जासूसी दुनिया श्रृंखला के सातवें उपन्यास चालबाज बूढ़ा का आवरण चित्र लेकर प्रस्तुत हुआ है। चलिए पहले आवरण चित्र देखते हैं:

आवरण चित्र: चालबाज़ बूढ़ा
फ्रंट कवर बायाँ, बैक कवर दायाँ
हार्पर द्वारा पुनः प्रकाशित इब्ने सफी के उपन्यासों की खासियत यह रही है कि पूरा आवरण चित्र बैक कवर और फ्रंट कवर को बनाकर ही बनता है। ऊपर दिए कवर को अगर आप देखें तो फ्रंट कवर एक कहानी कह रहा है और बैक कवर दूसरी कहानी कह रहा है। 

यह भी पढ़ें: जासूसी दुनिया श्रृंखला के सातवें उपन्यास 'चालबाज़ बूढ़ा' की समीक्षा

पहले फ्रंट कवर पर आये तो इसमें एक बूढ़ा बना है और वहीं नीचे की तरफ कुछ कबीले वाले एक व्यक्ति को खाट पर बाँधे उसे घेर कर खड़े हैं।  चूँकि शीर्षक चालबाज बूढ़ा है तो हम यह तो अंदाजा लगा सकते हैं कि यह बूढ़ा शायद वही हो। वहीं कबीले वालो को देखकर मन में यही प्रश्न उठता है कि इन कबीले वालों का कहानी से क्या लेना देना है। इन्होने ये किसे बाँधा हुआ है और ये अपने बंधक के साथ क्या करने वाले हैं? यह सभी बातें उपन्यास के प्रति उत्सुकता जगाते हैं। 

अगर बैक कवर पर हम आयें तो उसमें बंदूक पकड़े एक जासूस खड़ा है जो कि हो न हो शायद उपन्यास का नायक फरीदी ही है। वहीं बैक कवर पर एक औरत भी है जिसके हाथ में एक शीशी है जो कि वह पीने वाली है। यह औरत कौन है और वह शीशी से क्या पी रही है? क्या वो जहर है? अगर जहर है तो वह इसे क्यों पीना चाहती है? यह सब प्रश्न पाठक के मन में आवरण को देखकर आसानी से जागृत होंगे। 

चूँकि इसका आवरण चित्र किताब के प्रति उत्सुकता जगाता है तो मेरी नजर में यह एक अच्छा आवरण चित्र है। इस आवरण चित्र के लिये रज़ा अब्बास बधाई के पात्र हैं। उन्होंने ही इस आवरण चित्र को बनाया है और यह उपन्यास के साथ पूरा न्याय करता है। रज़ा अब्बास ने ही हार्पर द्वारा प्रकाशित जासूसी दुनिया और इमरान श्रृंखला के उपन्यासों के आवरण बनाये थे और बहुत खूबसूरत बनाये थे। वो एक अनुभवी कलाकार हैं और यह चीज आवरण में दिखाई देती है। 

क्या आपने इस उपन्यास को पढ़ा है? आपको यह आवरण कैसा लगा? जरूर बताइयेगा। 

किताब लिंक: amazon.in | amazon.com



बुधवार, 5 मई 2021

आवरण चित्र: अमोघ

आज आवरणों की दुनिया में मैं आपके समक्ष एक नहीं दो आवरण चित्र लेकर प्रस्तुत हुआ हूँ। परन्तु यह दो आवरण चित्र दो उपन्यासों के नहीं बल्कि एक ही लघु-उपन्यास के हैं। यह दोनों ही आवरण चित्र मुझे काफी पसंद आये थे तो सोचा इन्हें आपके साथ साझा का कर लूँ। 

तो चलिए पहले आवरण चित्र देख लेते हैं और फिर इस पर बातचीत करेंगे।

आवरण चित्र: अमोघ

तो ये थे अनुराग कुमार सिंह द्वारा लिखे गये उपन्यास अमोघ के आवरण चित्र। बायाँ वाला चित्र जो है वह अमोघ के ई बुक संस्करण का है और दायाँ तरफ का जो चित्र है वह पेपरबैक संस्करण है। ई बुक संस्करण प्रसिद्ध कॉमिक बुक आर्टिस्ट सुशांत पांडा द्वारा बनाया गया है वहीं पेपरबैक संस्करण को नवनीत सिंह (स्केच), हरेन्द्र सैनी (कलर ) और निशांत मौर्य (डिजाईन कैलीग्राफी) की टीम ने बनाया है।  दोनों ही आवरण चित्र रोचक हैं और पाठको के मन में उपन्यास के प्रति रूचि जगाने में सफल होते हैं।

अमोघ एक सुपरहीरो नोवल है और आवरण चित्रों को देखने से ही यह बात साफ़ पता लग जाती हैं। अगर दोनों आवरण चित्रों के देखें तो इसमें तीन लोग मुख्य तौर पर नज़र आते हैं। यह तीनों ही सुपर हीरो कॉस्टयूम में हैं। यह कौन हैं और कैसे सुपर हीरो बने यह प्रश्न मन में आ ही जाता है। 

दोनों आवरण चित्रों की ख़ास बात यह है यह थोड़ा बहुत इन तीनों की ताकतों के विषय में भी पाठकों को बता देता है। 

एक व्यक्ति इसमें मानव मशाल की तरह लग रहा है जो दर्शाता है कि उसकी शक्ति आग की है। वहीं पेपरबैक संस्करण वाले आवरण चित्र में यह भी दर्शाया गया है आग की ताकतों वाला व्यक्ति उड़ भी सकता है। इन तीनो में एक युवती भी है जिसके अन्दर उड़ने की ताकत दिख रही है। वहीं उड़ने के अलावा उस युवती के अन्दर क्या ताकत है यह पता नहीं चल पा रहा है। इन दोनों के आलावा नीले सूट में जो व्यक्ति है वह इस टीम का लीडर लग रहा है। वह कौन है और इनका लीडर क्यों है यह प्रश्न भी मन में उठता है।

दायें तरफ के आवरण में एक और व्यक्ति प्रमुखता से दिख रहा है। इसी के खिलाफ तीनो हीरोज लड़ते दिख रहे हैं। यह व्यक्ति कौन हैं और यह युद्ध किधर चल रहा है यह प्रश्न भी मन में उठ रहा है। 

अगर आप मेरी तरह कॉमिक बुक्स के शौक़ीन हैं तो आपको भी मेरी तरह इस उपन्यास को पढ़ने का मन जरूर रहा होगा। कॉमिक बुक में कई बार लेखक इतनी गहराई तक नहीं जा पाता लेकिन चूँकि यह किताब 150 पृष्ठों तक है तो उम्मीद है लेखक ने इसमें काफी अच्छे तरह से किरदारों को दर्शाया होगा। वहीं लेखक अनुराग कुमार सिंह चूँकि एक अनुभवी लेखक हैं तो देखना है कि उन्होंने इस बार पाठको के सामने क्या परोसा है। 

आपको बताते चलूँ कि उनका पूर्व प्रकाशित लघु उपन्यास मुखौटे का रहस्य भी मैं पढ़ चुका हूँ और वह मुझे पसंद आया था। देखना है यह उपन्यास कैसा बन पड़ा है। आवरण चित्र तो मन में उत्सुकता जगाने में कामयाब होता ही है।

आपका इन आवरण चित्रों के विषय में क्या सोचना है? मुझे बताना न भूलियेगा।  

किताब लिंक: पेपरबैक | किंडल

© विकास नैनवाल 'अंजान'

मंगलवार, 1 दिसंबर 2020

आवरण चित्र: मर्डर ऑन वैलेंटाइन्स

कर्षक आवरण चित्र  की बात की जाए तो हालिया रिलीज़ हुई एक किताब का आवरण चित्र ऐसा है कि यह सबका ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर रहा है। हिन्दी पल्प के स्वर्ण युग में जिस तरह से पेंट किये हुए आवरण चित्रों का ट्रेंड था कुछ उसी तरह का आवरण चित्र इस किताब का भी है।  अब तो ज्यादातर कवर डिजिटल रूप से बनाये जाते हैं जिनमें अलग अलग चित्रों को डिजिटल रूप से जोड़ा जाता है। इससे कवर तो आसानी और सस्ते में बन जाता है लेकिन इन आवरण चित्रों को देखने में मुझे तो वह मजा नहीं आता है क्योंकि सब स्टॉक फोटो होती हैं जिससे यह फैक्ट्री में बनाई गयी प्रतीत होती हैं। कोई नोवेल्टी इनमें नहीं होती है।

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

आवरण चित्र: लकड़ी का रहस्य

ज मैं आपके समक्ष राजा बाल पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित बाल उपन्यास लकड़ी के रहस्य का आवरण चित्र लेकर आ रहा हूँ। एक जमाना हुआ करता था जब एस सी बेदी जी के किरदार राजन इकबाल सभी बच्चों के पसंदीदा किरदार हुआ करते थे। उसी दौरान एस सी बेदी जी के कई बाल उपन्यास प्रकाशित हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि एस सी बेदी जी ने इस दौरान 1500 के करीब बाल उपन्यास लिखे थे। जितने ये बाल उपन्यास रोचक होते थे उतने ही रोचक इनके आवरण चित्र होते थे।

रविवार, 8 नवंबर 2020

आवरण चित्र: एक्सीडेंट एक रहस्य कथा - अनुराग कुमार जीनियस

आज जो आवरण चित्र मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ वह अनुराग कुमार जीनियस के उपन्यास एक्सीडेंट एक रहस्यकथा का है। यह किताब सूरज पॉकेट बुकस से प्रकाशित है। चूँकि  मैंने इस किताब को उनके सेट के साथ ही खरीदा था तो आवरण चित्र उस वक्त तो गौर से नहीं देखा था लेकिन अब देख रहा हूँ तो मुझे रोचक लग रहा है। सबसे पहले आप आवरण चित्र देख लीजिए।

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

आवरण चित्र: हिमसुंदरी

ज मैं आपके समक्ष यमुना दत्त वैष्णव की किताब हिमसुंदरी का आवरण चित्र लेकर आया हूँ। हिमसुंदरी मैंने 2018 के दिल्ली विश्व पुस्तक मेले से खरीदी थी। पुस्तक मेलों में मुझे घूमना पसंद रहा है क्योंकि उधर काफी ऐसी किताबें मिल जाती हैं जिनके विषय में पुस्तक मेले में जाने से पहले मुझे कोई जानकारी नहीं रहती है। ऐसे में नई और अनजान किताबों को मैं अपने साथ लेकर आ जाता हूँ। 2018 के दिल्ली पुस्तक मेले में भी ऐसी काफी किताबें मेरे साथ मेरे घर आईं थीं। 2018 के इस पुस्तक मेले की मेरी घुमक्कड़ी का वृत्तांत आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला- 2018 

रविवार, 4 अक्टूबर 2020

आवरण चित्र: The Demon Hunter of Chottanikkara

मुझे अक्सर ऐसे उपन्यास पढ़ना पसंद है जिसमें परालौकिक तत्व(सुपरनेचुरल एलिमेंट्स) मौजूद हों। राक्षस, भूत प्रेत, पिशाच जैसे जीवों की कल्पना करना और उनको लेकर लिखे गये कथानक पढ़ना एक रोमांच से मुझे भर देता है। ऐसे उपन्यासों की एक ख़ास बात तो इनके आवरण चित्र ही होते हैं जो कि बहुत ही रोचक बनाये जाते हैं। 

शनिवार, 26 सितंबर 2020

विज्ञापन #1

 वैसे तो हिन्दी अपराध साहित्य में छपने वाले आवरण चित्र ही बहुत रोचक होते हैं लेकिन कवर्स के बाद जो चीजें मुझे रोचक लगती हैं वो इन किताबों के बीच में छपने वाले विज्ञापन। कई बार तो विज्ञापन साधारण होते हैं लेकिन कई बार विज्ञापनों में रेखा चित्र दिए होते हैं। हमेशा से ही ऐसे रेखा चित्रों के प्रति मेरा आकर्षण रहा है। यह रेखा चित्र जिन किताबों के विज्ञापन देते हैं उनके प्रति रूचि जगाते ही जगाते हैं। अब निम्न रेखा चित्र देखिये:

शनिवार, 22 अगस्त 2020

आवरण चित्र: Moon - James Herbert

गर रोचक आवरण चित्रों की बात करूँ तो जेम्स हर्बर्ट के उपन्यास मून का नाम उनमें लेना गलत न होगा। जेम्स हर्बर्ट ब्रिटिश लेखक हैं जो अपने हॉरर उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं। यह उपन्यास मुझे याद है मैंने दरियागंज बाज़ार से 2017 में लिया था और उस वक्त जब पहली बार मैंने उपन्यास उठाया था तो मुझे पहले पहल तो लगा था कि आवरण चित्र फटा हुआ है। लेकिन जब मैंने गौर से देखा तो पाया कि यह आवरण चित्र फटा नहीं था बल्कि यह इसके खबूसूरत और रोचक डिजाईन का हिस्सा था। आगे बढ़ने से पहले आप आवरण चित्र ही देख लीजिये:

सोमवार, 27 जुलाई 2020

आवरण चित्र: कागज की नाव - सुरेन्द्र मोहन पाठक


कागज की नाव - सुरेन्द्र मोहन पाठक

कागज की नाव सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखा गया एक अपराध गल्प है। सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का नाम किसी किताब से जुड़ा हो तो यह लगभग तय होता है कि उपन्यास अपराध गल्प होगा। यह संस्करण वेस्टलैंड द्वारा प्रकाशित किया हुआ है। 

मंगलवार, 23 जून 2020

आवरण चित्र: रहस्य - जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा

हुत दिनों से इधर कुछ पोस्ट नहीं कर पाया हूँ। इसका एक कारण यह भी है कि कई दिनों से कोई रोचक आवरण चित्र नहीं दिखा। इस महीने वैसे भी पढ़ना कम ही हुआ। अब जनप्रिय ओम प्रकाश शर्मा जी का उपन्यास रहस्य पढ़ने को निकाला है। 

गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

आवरण चित्र : घाचर घोचर

आवरण चित्र : घाचर घोचर
साहित्यिक उपन्यासों के आवरण चित्र भी कई बार रोचक बन पड़ते हैं। विवेक शानभाग के उपन्यास घाचार-घोचर ने आते ही प्रसिद्धि पा ली थी। जब पहली बार मैंने इस उपन्यास का नाम सुना था तो उस वक्त मूल रूप से कन्नड़ में लिखे गये इस उपन्यास का अंग्रेजी संस्करण ही बाज़ार में आया था। नाम अजीब था और एक तरह से यह किताब के प्रति उत्सुकता जागाता था। लेकिन फिर जैसा कि अक्सर होता है आप किसी रोचक किताब के विषय में सुनते हैं और अगर उस वक्त उस पर ध्यान नहीं देते हैं तो आप उसे भूल जाते हैं।मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कुछ दिनों बाद इसके विषय में मैं भूल गया।


गुरुवार, 19 मार्च 2020

आवरण चित्र: बदला - ओम प्रकाश शर्मा 'जनप्रिय लेखक'

हिन्दी पल्प उपन्यासों के आवरण चित्रों की श्रृंखला मैं आपके समक्ष आज 'जनप्रिय लेखक' ओम प्रकाश शर्मा जी के उपन्यास बदला का आवरण चित्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह किताब मुझे अपने एक दोस्त द्वारा पढ़ने को दी गयी है। किताब में दर्ज जानकारी के हिसाब से इस किताब का पहला संस्करण 1992 में जनप्रिय लेखक प्रकाशन से प्रकाशित हुआ था। यह संस्करण कौन सा है इसकी कोई जानकारी इस किताब में नहीं दी गयी है। हाँ, यह जरूर बताया गया है कि उपन्यास के रूप में छपने से पहले इस किताब की कड़ियाँ हर रविवार कलकत्ते से प्रकाशित दैनिक सन्मार्ग से प्रकाशित हुई थीं। यह जानना रोचक है। वैसे आज भी पत्रिकाओं के कई उपन्यास इस तरह छपते हैं। आवरण  चित्र के ऊपर बात करने से पहले चलिए आवरण चित्र को देखते हैं।

सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

आवरण चित्र: अटैची रहस्य

जब से मेरा सत्यजित राय के किरदार फेलूदा से परिचय हुआ है उसके हर एक कारनामे को पढ़ने की इच्छा मेरे मन में बलवती सी हो गयी है। अक्सर मैं खुद को अमेज़न में सत्यजित राय की पुस्तकें सर्च करते हुए पाता हूँ और अगर कभी सत्यजित राय की किताबें हिन्दी में मिल जाती हैं तो उन्हें बिना किसी देरी के मँगवा देता हूँ। हिन्दी में सत्यजित राय की पुस्तकें कम ही उपलब्ध हैं और व्यक्तिगत तौर पर अन्य भारतीय भाषाओं में लिखी पुस्तकों के अंग्रेजी अनुवाद के बजाय हिन्दी अनुवाद पढ़ने में मुझे ज्यादा आनंद आता है। जब हिन्दी अनुवाद नहीं मिलते हैं और मिलने की उम्मीद ही नहीं होती है तो मैं अंग्रेजी के अनुवाद को तरजीह देता हूँ।

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

आवरण चित्र: गढ़ी के खंडहर

गढ़ी के खंडहर - राजनारायण बोहरे
कहा जाता है फर्स्ट इम्प्रैशन इस द लास्ट इम्प्रेशन। कई लोग इस बात को मानते भी हैं। कई मामलों में यह सत्य भी होता है। हम किसी चीज का अनुभव करते हैं तो पहले अनुभव से हम उस चीज के प्रति अपनी धारणा बना भी देते हैं। फिर वह अनुभव चाहे किसी नये व्यक्ति से मिलने का हो या किसी चीज को पहली बार देखने का।

लेकिन फिर जीवन में कई लोग और चीजें ऐसी मिलती हैं जो पहली दफा तो आपको प्रभावित नहीं करती हैं लेकिन अगर आप उनके पास दोबारा जाओ तो तब जाकर उनका प्रभाव आप पर असर डालता है।

ऐसा ही अनुभव मुझे 'गढ़ी के खंडहर' के आवरण चित्र के साथ हुआ। जब पहली बार बुक फेयर में मैंने इसे देखा तो मुझे यह साधारण लगा। किताब में काफी गहरे रंगों का प्रयोग था। मुझे आवरण चित्र ने आकर्षित नहीं किया और मैंने इसे नहीं लिया।  इसके जगह मैंने कुछ और किताबें ले ली थीं।

वहीं मेरे मित्र को यह कवर पसंद आया तो उन्होंने इसे ले लिया। मेरे दोस्त फिलहाल मेरे साथ ही रह रहे हैं तो इस कारण मुझे इस किताब को दोबारा देखने का मौक़ा मिला तो और इस दोबारा हुई मुलाकात में इसने मुझ पर असर डाला। कवर को गौर से देखने पर मैंने पाया कि इसमें रात का एक दृश्य दिखाया जा रहा है।

गहरी अँधेरी रात है। एक किला नुमा जगह है और आवरण चित्र के नीचे की तरफ दायें कोने में दो व्यक्ति गुत्थमगुत्था हो रखे हैं। एक व्यक्ति दूसरे पर प्रहार करता सा दिखता है। नीले काले रंग का संयोजन काफी अच्छा बन पड़ा है। कोने में मौजूद व्यक्ति कवर को रहस्यमयी बनाते हैं।

शीर्षक चूँकि गढ़ी का खंडहर था तो मुझे यह तो अंदाजा था कि यह गढ़ी के खंडहर का ही दृश्य है। लेकिन यह दो व्यक्ति कौन हैं और ये क्यों लड़ रहे हैं? इतनी रात गये यह लोग इस खंडहर में क्या कर रहे हैं?

यह सब सवाल इस आवरण चित्र को देखकर अचानक से मन में आते हैं। इस कवर का सबसे जरूरी हिस्सा यही दो आपस में  लड़ते हुए व्यक्ति हैं। यही वो हिस्सा हैं जिसे मैंने जब पहली बार कवर उठाया था तो जल्दबाजी में नहीं देखा था लेकिन जब दूसरी बार उठाया तो देखा और इस कारण इस आवरण चित्र को मैंने आकर्षक पाया।

सवालों के जवाब तो मुझे किताब पढ़कर मिल ही जाने थे। लेकिन, ये बात तो तय हो गयी थी कि कभी कभार आप किसी चीज को ठहर के देखो या दूसरी बार देखो तो यह आपको आकर्षित कर देती है।

अगर जल्दबाजी में देखो या पहली बार देखो तो ऐसी कई पहलू होते हैं जिन पर आपका ध्यान नहीं जाता और आप उनके प्रति गलत राय भी बना सकते हैं।

इसके ऊपर आपका क्या सोचना है?

आवरण चित्र मुझे तो पसंद आया। आपका क्या ख्याल है?

©विकास नैनवाल 'अंजान'

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

आवरण चित्र: जुआघर

जुआघर

हिन्दी पल्प उपन्यासों के आवरण चित्र मुझे हमेशा से ही आकर्षित करते रहे हैं। विशेषकर पुराने वक्त के उपन्यास जिनके कवर किसी पेंटिंग से कम नहीं होते थे।

 उन दिनों कलाकार को उपन्यास का कवर बनाने के लिए कहा जाता था तो बाकायदा पेंटिंग पेंट करता था। उस वक्त कलाकार काम होता था कि वह ऐसा आवरण चित्र तैयार करे कि पाठक आवरण चित्र देखकर ही पुस्तक खरीदने को आतुर हो। आवरण देखकर उसके मन में कथानक पढ़ने की इच्छा जागृत हो जाये। 

यही कारण है कि जहाँ पहले उपन्यासों के कथानक के हिसाब से कवर बनते थे वहीं आगे चलकर आवरण चित्रों में आकर्षक बालाओं की मौजूदगी बढ़ने लगी। भले ही उपन्यास में उत्तेजक सामग्री न हो लेकिन किताबो के आवरण में उत्तेजक बालाएं भी आने लगी। लेकिन फिर मंदी का दौर आया। डिजिटाईजेशन का दौर आया। और इस दौर में आवरण बनाने के खर्चे को कम करने के लिए प्रकाशकों ने नई तरकीब निकाली। अब वह टुकड़े आर्टिस्ट से बनवाते हैं और फिर उन विभिन्न टुकड़ों को अलग अलग तरह से डिजिटली मॉडिफाई करके अपने कवर के लिए प्रयोग में लाते हैं। इससे उन्हें फायदा यह होता है कि एक टुकड़े को बनाने के पैसे तो एक बार देते हैं लेकिन उसका इस्तेमाल असंख्य बार, असंख्य आवरण चित्रों में कर सकते हैं।

उपरोक्त कवर भी ऐसे ही तरीके से बनाया लगता है। कवर में एक स्त्री है, एक पुरुष है जिसके हाथ मे गन है और एक कैसिनो यानी जुआघर है। तीनों अलग अलग तत्व हैं जिन्हें बाद में शीर्षक के हिसाब से जोड़ा गया है। अगर आप राजा पॉकेट बुक्स से प्रकाशित  अन्य उपन्यास देखेंगे तो शायद यह स्त्री और वह पुरुष दूसरे आवरण चित्रों में भी मिल जायें।

कवर की बात करूँ तो इन तत्वों को देखकर साफ़ प्रतीत होता है कि यह कथानक किसी जुयेघर के इर्द गिर्द बुना गया है। शीर्षक भी चूँकि जुआघर है तो पाठक के रूप में मेरे मन में यह विचार पुख्ता हो जाता है कि उपन्यास का कथानक इसी जुआघर के इर्द गिर्द बुना गया होगा।

कवर में कुछ पंक्तियाँ भी दर्ज हैं :

जगमोहन कसीनो में डकैती की तैयारी कर रहा था और देवराज चौहान की नज़र उस पर थी। साजिश का जाल हर तरफ बिछा हुआ था।

यह तहरीर और कवर में दर्ज किया देवराज चौहान सीरीज यह दर्शाने के लिए काफी है कि प्रस्तुत उपन्यास देवराज चौहान श्रृंखला का है। देवराज को जो पढ़ते हैं वो जानते हैं कि देवराज डकैती मास्टर है तो वह अंदाजा लगा सकते हैं कि इस उपन्यास में जुआघर में ही डकैती होगी। हाँ, फर्क बस यह है कि इस बार देवराज तैयारी नहीं कर रहा है। वह केवल नज़र रख रहा है। तैयारी जगमोहन कर रहा है जो कि दूसरे उपन्यासों में देवराज के लिए  काम करता प्रतीत होता है।

कवर में एक और बिंदु है जो मुझे आकर्षित कर रहा है। इसमें एक स्त्री बनी हुई है। इससे मन में एक प्रश्न तो उठता है। वह यह कि क्या इस उपन्यास में कोई स्त्री अहम भूमिका में है। अगर हाँ, तो उसका क्या रोल रहेगा। या फिर कवर को आकर्षित बनाने के लिए ही स्त्री का प्रयोग किया गया है। वहीं एक प्रश्न ये भी है कि यह पुरुष कौन है? इसके हाथ में बंदूक क्यों है? क्या यह जगमोहन है या कोई अन्य व्यक्ति? इसका इस स्त्री से क्या रिश्ता है?

खैर, यह सब तो उपन्यास पढ़ने के पश्चात ही पता चलेगा। कवर के विषय में यही कहूंगा कि डिजिटल रूप से मॉडिफाई किये हुए ऐसे कवर मेरे पसंदीदा नहीं रहे हैं। अगर इस उपन्यास का आवरण चित्र भी पेंट करवाया गया होता तो वह असर डालता लेकिन फिर भी यह कवर मुझे उतना बुरा नहीं लगा। इस कवर की खास बात यह है कि इसके तत्वों को कथानक के हिसाब से जोड़ा गया है। इस बात के लिए ही कवर डिज़ाइनर की तारीफ़ बनती है वरना तो आजकल कई उपन्यासों में कवर का उपन्यास के कथानक से दूर दूर तक लेना देना नहीं होता है।

आपको किस तरह के आवरण चित्र पसंद हैं: पुराने वक्त के पेंट किये हुए या आज के डिजिटल रूप से बनाये गये? 

© विकास नैनवाल 'अंजान'

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

आवरण चित्र : लाल रेखा

लाल रेखा - कुशवाहा कांत
पिक्चर क्रेडिट: सुजाता देवराड़ी
लाल रेखा के विषय में मैंने तब पढ़ा था जब मैं हिन्दी पल्प उपन्यासों के विषय में लिखे लेख खोज खोज कर पढ़ता था। फिर एक लेख कुशवाहा कान्त के विषय में भी पढ़ने को मिला और उन लेखों से भी किताबों की मकबूलियत का अहसास हुआ। मन में लाल रेखा पढ़ने की इच्छा जागी थी लेकिन चूँकि उपन्यास काफी वक्त से आउट ऑफ़ प्रिंट था तो इस क्षुधा को शांत करने के लिए मैं कुछ नहीं कर सकता था। रमाकांत जी ने जासूसी संसार के माध्यम से इसका स्कैन पढ़ने की व्यवस्था भी की थी लेकिन स्कैन पढ़ने में वो मज़ा नहीं आता है जो किताब हाथ में लेकर पढ़ने में आता है।

ऐसे में जब अमेज़न पर तफरी करते हुए बरबस ही इस आवरण चित्र ने मुझे अपनी तरफ आकर्षित किया तो मेरा हैरान होना लाजमी था। इस आवरण में रंगों को जो संयोजन है वह आपकी दृष्टि अपनी तरफ खींच लेता है। जिस लाल रेखा की मुझे तलाश थी वो आखिर पुनः प्रकाशित हो गयी थी। इसलिए बिना वक्त गँवाये मैंने इसे खरीद लिया था।

चूँकि यह ब्लॉग पुस्तक के आवरण चित्रों के ऊपर ही है तो अब मैं उपन्यास की बात न करके इसके आकर्षक आवरण चित्र की ही बात करूँगा।

इस आवरण चित्र को आप गौर से देखें तो मुख्य रूप से आपको दो किरदार दिखते हैं। एक स्त्री और एक पुरुष। आवरण देखकर ही लगता है कि कथानक इन्हीं दो किरदारों के इर्द गिर्द घूमता है। मुझे यह पता है कि पुरुष का नाम लाल है और स्त्री का नाम रेखा है। लेकिन जिस तरह से शीर्षक को लिखा गया है उससे साफ लगता है कि एक लाल रेखा अन्य भी है जो इन्हे विभाजित कर रही है।इन्हे अलग कर रही है।

किरदारों के अतिरिक्त काफी लोग हैं जो आउट ऑफ़ फोकस है। यह आउट ऑफ़ फोकस चित्र स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों की याद दिलाता है। इसका आवरण में होना भी यह दर्शाता है कि इस आंदोलन का इन मुख्य किरदारों के जीवन में कुछ न कुछ असर पड़ता होगा।

क्या यह आंदोलन ही वह रक्त रंजित लाल रेखा है जो इनके अलगाव का कारण बनेगी?? आखिर कौन हैं ये स्त्री और पुरुष? इनका इस आंदलोन से क्या लेना देना है?

ऐसे ही कई प्रश्न केवल इस आवरण को देखने भर से आपके मन में उभरेंगे। इसके लिए आपको उपन्यास की कथावस्तु से परिचित होने की आवश्यकता नहीं है। एक अच्छा आवरण चित्र यही काम करता है। वह किताब के कथानक के प्रति एक संकेत देता है। पाठक के मन में उस किताब के प्रति कौतूहल जगाता है।

इसलिए उपन्यास कैसा होगा यह तो इसे पढ़ने के बाद में पता चलेगा लेकिन आवरण चित्र बनाने वाली अर्चना जैन जी बधाई की पात्र हैं।

मेरे नज़र में यह एक अच्छा आवरण चित्र है।


लाल रेखा के ऊपर लिखा लेख जिसने मेरी रूचि इस उपन्यास के प्रति जगाई थी:
लाल रेखा 

कुशवाहा कान्त जी के ऊपर लिखा लेख जिसने मेरी रूचि कुशवाहा कान्त और उनके उपन्यासों के प्रति जगाई थी:
कुशवानी


© विकास नैनवाल 'अंजान'

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